
सिवान। मैरवा का बिचली बाजार कभी गल्ला मंडी के लिए जिले भर में मशहूर था, लेकिन आज गल्ला मंडी की जगह मशीनरी व्यवसाय ने ले लिया है।
बताते हैं कि समय के साथ-साथ गल्ला मंडी दम तोड़ता चला गया। गल्ले का व्यवसाय करने वाले बेरोजगार होने लगे। इस व्यवसाय में लगे दुकानदार नए व्यवसाय की तलाश में जुट गए। धीरे-धीरे बिचली बाजार में मशीनरी व्यवसाय ने पैर फैलाना शुरू कर दिया। आज यहां अधिकांश दुकानें मशीनरी व्यवसाय और इससे संबंधित आटो पार्ट्स से जुड़ी हुई हैं। मैरवा प्रखंड समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों से ग्राहक यहां पहुंचते हैं। इतना ही नहीं यहां से मशीनरी कारोबार उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों में भी होता है। बिचली बाजार ने मशीनरी व्यवसाय के रूप में अपनी पहचान पिछले एक दशक में तेजी से बनाई है। जेनरेटर, पंप सेट, कृषि और पशुपालन से संबंधित मशीन और उसके पार्ट्स-पुर्जे की यहां दर्जनों दुकान स्थित है। हार्डवेयर की भी दुकानें उपलब्ध हैं। कई जिलों के साथ होता था गल्ला व्यवसाय
20वीं सदी में मैरवा का बिचली बाजार गल्ला मंडी के रूप में प्रसिद्ध था। पुराने व्यवसायी बताते हैं कि यहां से गल्ला का व्यवसाय सिवान, गोपालगंज, छपरा, देवरिया समेत यूपी बिहार के कई जिलों के साथ होता था। व्यापारी इन जिलों से यहां पहुंचते थे। बैलगाड़ी भी खूब चला करते थे। गल्ला खरीदकर बैलगाड़ी द्वारा यहां से ले जाते थे। दिन भर बैलगाड़ी का आना-जाना लगा रहता था। बैलगाड़ी रखने वालों का भी अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ सब कुछ बदल गया। खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद गल्ला व्यवसाय मंदा पड़ने लगा। जन वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीबों को गेहूं-चावल की आपूर्ति होने लगी। इससे बाजार में गल्ला की मांग कम हो गई। धीरे-धीरे यह व्यवसाय दम तोड़ता चला गया। 21वीं सदी शुरू होते होते गला व्यवसाय में लगे लोगों ने दूसरे व्यवसाय में रोजगार तलाशना शुरू कर दिया। ----
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मशीनरी व्यवसाय में बदल गया सिवान जिले का बिचली बाजार - दैनिक जागरण
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