
झारखंड के युवा सांस्कृतिक, सामाजिक सोच के आधार पर दो तरह के हैं. एक वे जो पढ़-लिखकर, नौकरी में जाना चाहते हैं. दूसरे वे जो अपनी रूचि के अनुसार कुछ व्यवसाय करना चाहते है. व्यवसाय में प्रवेश का रुझानतीन चार वर्षों में ज्यादा बढ़ गया दिखता है. फलतः पेट्रोल पंप, होटल, कपड़ों के शो-रूम, गृह निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, आदिवासी-परिधान, फैशन-डिजाइनिंग, फोटो, विडियोग्राफी, आधुनिक गीतों के वीडियो अलबम, ट्रेवल एजेंसी, बीमा, नर्सरी-स्कूल चलाना, ग्रामीण इलाकों में स्कूल खोलना, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर चलाना, डेयरी, फार्मिंग, कार-वाशिंग, ठेले पर पकौड़ी धुसका बेचना, पुस्तक विक्रय व्यवसाय, नर्सिंग सेंटर, होटल आदि के कई छोटे-बड़े व्यवसाय करते आदिवासी दिख रहे है.
My Mati: आदिवासी पहचान और परंपरा को आर्थिक विस्तार और रफ्तार देते युवा - प्रभात खबर - Prabhat Khabar
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