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बरखेड़ा (पीलीभीत)। लॉकडाउन में दुकानें बंद होने के बाद नुकसान झेल चुके कपड़ा व्यापारियों का अनलॉक के डेढ़ माह बाद भी राहत नहीं मिल सकी है। उनका कहना है कि बाजार तो खुल गए मगर दिक्कत बनी हुई है। सहालग निकलने से कारोबार को गति नहीं मिल पा रही है।
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ब्लॉक बरखेड़ा क्षेत्र में 50 से अधिक कपड़े की दुकानें हैं। आम दिनों में प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपये तक का कारोबार होता था। मगर कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल मार्च से ही परेशानी बनी हुई है। पिछले साल कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा तो नुकसान हो गया था। इस बार सहालग के समय में लगे लॉकडाउन से बाजार को रफ्तार नहीं मिल सकी। एक जून से दुकानें तो खुल गईं, मगर अब लोग जरूरत के हिसाब से ही कपड़े की खरीदारी कर रहे हैं। इस वजह से बिक्री महज 25 प्रतिशत रह गई है। व्यापारियों का कहना है कि यही हाल रहा तो छोटे व्यापारियों की दुकानें ही बंद हो जाएंगी।
व्यापारियों का दर्द
कपड़े का कारोबार सहालग में रफ्तार पकड़ता है, मगर उस समय कोरोना संक्रमण बढ़ा और लॉकडाउन लग गया। अब अनलॉक में दुकानें तो खुल गई हैं, मगर ग्राहक नहीं रह गए हैं। - इंतजार अहमद
पिछले साल से कारोबार ठप पड़ा हुआ है। आम दिनों की अपेक्षा 25 प्रतिशत की भी बिक्री अब नहीं रह गई है। ऐसे ही चलता रहा तो छोटे व्यापारियों की दुकान पर तो ताले लग जाएंगे। - सूर्यप्रकाश अग्रवाल
सेल पूरी तरह से ठप है। लोग अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं। जो नुकसान हो चुका, उसकी तो भरपाई होना मुश्किल है। बस आगे और नुकसान न हो, इसके लिए राहत मिलनी चाहिए। - मनमीत सिंह
कोरोना की मार से पिछले साल से ही कारोबार ठप है। सहालग में इस बार उम्मीद थी, मगर उन्हीं दिनों में लॉकडाउन लग गया। बिजली का बिल, दुकान के रखरखाव और कर्मचारी का वेतन निकालना ही महंगा पड़ता है। सरकार को कुछ राहत देनी चाहिए। - राजू
ब्लॉक बरखेड़ा क्षेत्र में 50 से अधिक कपड़े की दुकानें हैं। आम दिनों में प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपये तक का कारोबार होता था। मगर कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल मार्च से ही परेशानी बनी हुई है। पिछले साल कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा तो नुकसान हो गया था। इस बार सहालग के समय में लगे लॉकडाउन से बाजार को रफ्तार नहीं मिल सकी। एक जून से दुकानें तो खुल गईं, मगर अब लोग जरूरत के हिसाब से ही कपड़े की खरीदारी कर रहे हैं। इस वजह से बिक्री महज 25 प्रतिशत रह गई है। व्यापारियों का कहना है कि यही हाल रहा तो छोटे व्यापारियों की दुकानें ही बंद हो जाएंगी।
व्यापारियों का दर्द
कपड़े का कारोबार सहालग में रफ्तार पकड़ता है, मगर उस समय कोरोना संक्रमण बढ़ा और लॉकडाउन लग गया। अब अनलॉक में दुकानें तो खुल गई हैं, मगर ग्राहक नहीं रह गए हैं। - इंतजार अहमद
पिछले साल से कारोबार ठप पड़ा हुआ है। आम दिनों की अपेक्षा 25 प्रतिशत की भी बिक्री अब नहीं रह गई है। ऐसे ही चलता रहा तो छोटे व्यापारियों की दुकान पर तो ताले लग जाएंगे। - सूर्यप्रकाश अग्रवाल
सेल पूरी तरह से ठप है। लोग अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं। जो नुकसान हो चुका, उसकी तो भरपाई होना मुश्किल है। बस आगे और नुकसान न हो, इसके लिए राहत मिलनी चाहिए। - मनमीत सिंह
कोरोना की मार से पिछले साल से ही कारोबार ठप है। सहालग में इस बार उम्मीद थी, मगर उन्हीं दिनों में लॉकडाउन लग गया। बिजली का बिल, दुकान के रखरखाव और कर्मचारी का वेतन निकालना ही महंगा पड़ता है। सरकार को कुछ राहत देनी चाहिए। - राजू
बाजार तो खुल गए मगर कपड़ा व्यवसाय ने नहीं पकड़ी रफ्तार - अमर उजाला
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