
करोङो रुपयों की लागत से बनी कृषि उपज मंडी का नहीं कोई रखबाला
सुविधाएं ना होने से 50 मैं से दर्जन भर अब जुडे हैं व्यापारी।
बाड़ी . कभी शहर की कृषि उपज मंडी का व्यवसाय दूर दूर तक जाना जाता था जो आज मंडी व्यवसाय चौपट होने के कगार पर है । करोड़ों रुपयों की लागत से बनी मंडी समिति का कोई रखवाला नहीं है ।
बाड़ी बसेड़ी मार्ग पर चलने वाली इस कृषि उपज मंडी समिति को सरकार द्वारा इस उद्देश्य से बनाया गया था कि यहां व्यापारियों के साथसाथ किसानोंए मजदूरों को पूरी सुविधाऐं व संसाधन मिलेंगे ।
मगर आज हालात यह हैं कि यहां सुविधाओं के नाम पर अब कुछ भी नहीं है । सरकार व आला अफसरों की अनदेखी के कारण अधिकांश व्यापारियों ने यहां से नाता तोड़ दिया है ।
आपकी जानकारी में दे दें कि वर्ष 1984 में पुरानी अनाज मंडी से नवीन मंडी में व्यापारी इसी आशा और विश्वास के साथ पहुंचे थे कि उनका व्यवसाय प्रगति की ओर अग्रसर होगा और उस समय चालीस से अधिक अनुज्ञापत्र धारी व्यापारियों का व्यवसाय चलता था ।
सरकारी रिकाड में तो आज भी इतने ही व्यापारी हैं । मगर स्थिति यह है कि मात्र दर्जन भर व्यापारी इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं ।सरकार द्वारा व्यापारियों के लिए 50 दुकानें बनाई गयी थी । जिनको ए बी सी ब्लाकों में बांटा गया था ।
इन पचास दुकानों में से भी आज तीन दुकानों की छत टूट गयी है ।जिसका कोई धना धोरी नही हैए मंडी के व्यवसाय से जहां व्यापारियों के परिवार का रोजगार चलता थाए वहां मजदूरों के परिवारों का भरण पोषण होता था जो आज सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है ।हकीकत यह है कि आज सरकार द्वारा इस मंडी को मात्र गौड मंडी बनाकर रख छोड़ा है । जिसका चार्ज धौलपुर कृषि उपज मंडी समिति के सचिव के पास है ।
प्रमुख ट्रांसपोर्ट व्यवसाई सुनील कोठारी का कहना है कि कभी देश के पश्चिम बंगालए गुजरातए बिहार के लिए माल भेजने को व्यापारियों को टृक भेजने के लिए बुकिंग करानी पड़ती थी ।मगर आज फसल के समय आज भी थोड़ा बहुत काम ही चल पाता है । सरकार को अवश्य ध्यान देना चाहिए।
प्रमुख व्यापारी रामनिवास उर्फ पप्पू बताते हैं कि व्यापारियों के हित के लिए मंडी समिति के आला अफसरों और जन प्रतिनिधियों को मंडी समिति में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर करना चाहिए
युवा मंडी व्यवसाई सुनील गोयल का कहना है सैंतीस वर्ष हो गये हैं मंडी में काम करते हुए ।मगर आज तक सरकार और प्रशासन कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं करा पाया । यहां तक कि सड़क तक की व्यवस्था नहीं हो पाई है ।
मंडी कमेटी के प्रमुख व्यवसाई मुरारी लाल गर्ग ने बताया कि चालीस साल पहिले पुरानी अनाज मंडी में चलने वाले इस कारोबार को न तो सरकार ने कभी प्रोत्साहन दिया और न ही समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने यहां के व्यापारियों का कभी समाधान किया । इसके कारण आज मंडी से अधिक कारोबार अग्रवाल धर्मशालाए अम्बेडकर पार्क और सैंपड रोड के पास होता है । यदि इन व्यापारियों को मंडी में शिफ्ट किया जाए तो सरकार को मोटे राजस्व की प्राप्ति होगी और मंडी की शेष बंद पड़ी दुकानोंमें कारोबार प्रारंभ हो सकेगा ।
मंडी के प्रमुख ब्रोकर दिनेश मामा बताते हैं कि मंडी के कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैंकडों परिवारों को रोजगार मिलता था । पुराने दिनों की याद करते हुए मामा के नाम से दलाली करने वाले परिवार के सभी लोग मंडी से जुड़े हुए थे । पिता रामजीलालए भाई रामनिवासए दिनेशचंदए विनोदकुमारए घनश्याम और बबलू मंडी से जुड़े हुए थे । आज सभी अन्य कारोबारों को देख रहे हैं । गंज में जिस तरह मंडी की साख और विश्वास था कि किसान बिना मोल भाव किए अपनी फसल आढ़तियों को भेज देते थे । सरकार के थोड़े सेप्रयास के बाद इस कारोबार को नये पंंख लगेंगे।
प्रमुख मंडी व्यवसाई गोपाल दास गर्ग उमरेह का कहना है जिस मंडी के कारण बसेड़ी रोड़ आज गुलजार हैए वही मंडी में हमारा व्यापार फसल तक ही सीमित रह गया है । सरकार ने तो इस मंडी को प्रारंभ होने के बाद से मुंह मोड़ ही लिया है । मंडी समिति के चुनावों के समय अवश्य जनप्रतिनिधि हमारे दुख सुनने अवश्य आते हैं । व्यापारियों को पूरी सुविधाऐं मिलें और कम से कम सुरक्षा के तो इंतजाम हों तोवहदिन दूर नहीं जब यहां पहिले की ही तरह व्यवसाय चल निकलेगा ।
प्रमुख व्यवसाई एवं प्रमुख राजनेता तारा चंद गोयल बताते हैं कि आज भी बाड़ी के सरसों के तेल की पूरे देश में साखहै । सरकार की अनदेखी ने पूरे व्यवसाय का मटियामेट कर दिया हैए यहां का सरसों का तेल आज भी देश के बड़े नगरों में भेजा जारहा है । सरसों की सबसे ज्यादा फसल करने वाले डांग इलाके से काफी माल आता है ।मगर प्रशासन और सरकार ने इस कारोबार की हमेशासे अनदेखी की है । आज अकेले सरसों के तेल व्यवसाय पर सरकार थोड़ा सा भी ध्यान दे तो भरतपुर और मुरैना की तरह तेल का व्यापार काफी बढ़ सकता है ।
मंडी के प्रमुख कारोबारी हरिओम गर्ग बागठरिया का कहना है कि मंडी समिति में पानी के लिए सरकार द्वारा भले ही तीन हैण्डपंप लगा रखे हैंए मगर उनका कोई धनी धोरी नहीं है ।तीन में से दो हैण्डपंप खराब हैंए जहां मुख्य कारोबार हैए वह हैण्डपंप काफी समय से खराब है ।जिले के मुखिया जिला कलक्टर यदि थोड़ा सा भी ध्यान देंगे तो अव्यवस्थाओं बेहतर होंगी ।
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