
जागरण संवाददाता, दोहरीघाट (मऊ) : मां सरयू के उत्तरायणी तट पर बसे कस्बे को छोटी अयोध्या, दो हरियो की पावन भूमि और दोहरीघाट के नाम से संबोधित किया जाता है। इस पौराणिक नगरी में अब व्यवसायिक गतिविधियां एक के बाद एक ठप हो गई हैं।
इस नगर में कभी दर्जनों कल कारखानों सहित सहकारी शीत गृह थे। रेलवे का रैक लगता था। हजारों लोगों को रोजी रोजगार मिलता था। आज हर कारोबार को पूर्णतया जंग लग गया है।
राम परशुराम की मिलन स्थली दोहरीघाट आज विकास से कोसों दूर है। कभी दर्जनों दाल मिलें इस नगर की पहचान थीं। आज दो तीन मिलें ही बमुश्किल से चलती हैं। अंग्रेजों के जमाने में बने यहां के रेलवे स्टेशन पर कभी प्रतिदिन कोयले व सीमेंट का रैक आता था। मालगाड़ियों से दिन रात माल उतरता था। सैकड़ो मजदूरों की रोजी रोटी तो चलती ही थी साथ ही साथ व्यवसाय फलता फूलता था। दोहरीघाट से ट्रेनों का संचालन क्या बंद हुआ अर्थव्यवस्था ही प्रभावित हो गई। बाहरी व्यवसायी नगर से पलायन करने को मजबूर हो गए। कोल्ड स्टोरेज भी आज करीब पच्चीस वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। नगर ने हाल के तीस सालों में विकास का मुंह देखा ही नही। धीरे-धीरे यह नगर बर्बादी की भेट चढ़ता जा रहा है। यहां के जनप्रतिनिधि भी नगर की हालत पर चुनावी भाषणों में चिता प्रकट करते हैं और तमाम दावे करते हैं पर चुनाव के बाद कहीं कोई एक ईंट रखने को भी तैयार नहीं होता है।
Edited By: Jagran
ठप हो गई दोहरीघाट के व्यवसाय की गतिविधियां - दैनिक जागरण
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