
शिवसागर। प्रखंड में सैकड़ों किसानों ने अपनी निजी भूमि में तालाब बनाकर मत्स्य पालन करना शुरू किया है। पहले तो यह धंधा लाभदायक रहा, लेकिन अब घाटा उठाना पड़ रहा है। एक दो सीजन के बाद मछलियों के उत्पादन में दो सौ गुना वृद्धि हुई, लेकिन बाजार में खरीदने वाले नहीं बढ़े। इससे कम मूल्य पर मछलियों को बेचना पड़ा। इससे मछली उत्पादकों को घाटा हो रहा है।
चंन्दनपुरा के मिथिलेश सिंह ने बताया यह व्यवसाय लाभप्रद था। लेकिन, आज घाटा दे रहा है। छोटी छोटी मछलियों का पालन करने वाले किसानों का तो और बुरा हाल है। मछलियों के दाने महंगे हो गए हैं। जबकि बाजार में मछली की मांग और कीमत दोनों नहीं बढ़ी है। इससे किसानों की लागत अधिक और लाभ शून्य हो रहा है। इससे वह कंगाल होने के कगार पर पहुंच गए हैं। मोजरी के मुन्ना सिंह व बैजनाथ सिंह ने बताया कि हजारों क्विंटल मछलियां तालाब में हैं, लेकिन खरीदने वाले नहीं हैं।
घाटे का धंधा बन रहा मत्स्य व्यवसाय - Hindustan हिंदी
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