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कोडरमा2 घंटे पहले
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सरकार की ओर से चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल माह से शहरी क्षेत्रों में स्थित आवासीय व गैर आवासीय भवनों के लिए सर्किल रेट से होल्डिंग टैक्स के निर्धारण किए जाने के बाद टैक्स के रूप में शहर वासियों को पहले की अपेक्षा लगभग 300 गुना अधिक टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा।
टैक्स की नई दर आवासीय भवनों की अपेक्षा कमर्शियल भवनों पर लगभग डेढ़ गुना अधिक होगी। नई दर की मंजूरी सरकार की ओर से दी जा चुकी है। वहीं इसके बाद यह दर एक अप्रैल से शहरी क्षेत्र में लागू कर दी गई है।
फिलहाल सॉफ्टवेयर अपडेट करने का कार्य किया जा रहा है। वहीं, पुराने दर पर टैक्स की वसूली पर रोक लगा दी गई है। पूर्व में जहां शहरी क्षेत्र के आवासीय व गैर आवासीय भवनों का होल्डिंग टैक्स सड़क की चौड़ाई के आधार पर वार्षिक किराया मूल्य का 2 प्रतिशत के रूप में लिया जाता था।
वहीं अब टैक्स की वसूली रजिस्ट्रेशन कार्यालय द्वारा तय किए गए पक्के कच्चे मकानों के सर्किल रेट के आधार पर ली जाएगी। सर्किल रेट के आधार पर टैक्स की वसूली का नियमावली लागू किए जाने के बाद जिले के झुमरीतिलैया, कोडरमा, डोमचांच शहरी क्षेत्र के लोगों को कर के रूप में पहले की अपेक्षा लगभग 300 गुना अधिक राशि चुकानी पड़ेगी।
होल्डिंग टैक्स की वसूली के लिए निर्धारित किए गए सर्किल रेट को आधार बनाए जाने से झुमरीतिलैया शहर वासियों को सबसे अधिक टैक्स कर के रूप में चुकानी पड़ेगी। कर की वसूली के लिए नियुक्त रितिका इन्फोटेक के परियोजना प्रबंधक सह शाखा प्रबंधक विनोद रवानी के अनुसार पूर्व में शहरवासियों से वार्षिक किराया मूल्य का दो प्रतिशत होल्डिंग टैक्स के रूप में लिया जाता था।
इसके तहत 0 से 20 फीट सड़क के किनारे स्थित आवासीय भवनों से सालाना 700 रुपए टैक्स के रूप में लिए जाते थे । वहीं नई दर लागू होने के बाद अब 1000 वर्ग फीट में स्थित मकानों से लगभग 2300 रुपए वार्षिक होल्डिंग टैक्स की वसूली की जाएगी। जो पूर्व के टैक्स से लगभग 350 प्रतिशत अधिक होगा।
वहीं शहर में स्थित व्यवसायिक भवनों का वार्षिक होल्डिंग टैक्स आवासीय भवनों से लिए जाने वाले टैक्स से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा होगी। इससे व्यवसायिक भवनों के टैक्स में लगभग 400 से 700 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
शाखा प्रबंधक रवानी ने बताया कि सर्किल रेट के आधार पर लागू किए गए नए होल्डिंग टैक्स की दर के अनुसार पूर्व में जहां 6000 वर्ग फीट से ज्यादा भूमि पर स्थित औद्योगिक केंद्रों से वार्षिक किराया मूल्य के दो परसेंट के अनुसार पूर्व में लिए जाने वाले 3 लाख के लगभग का होल्डिंग टैक्स बढ़कर अब 20 से 22 लाख रुपए सालाना हो जाएगा।
औद्योगिक केंद्रों का होल्डिंग टैक्स में लगभग 700 गुना की वृद्धि का अनुमान है। उन्होंने बताया कि झुमरीतिलैया शहर की अपेक्षा कोडरमा शहर में नए सिरे से लागू किए गए टैक्स के तहत होल्डिंग टैक्स में कम वृद्धि की गई है।
झारखंड में सबसे अधिक कोडरमा में निर्धारित है फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन दर
सरकार की ओर से शहरी क्षेत्रों के आवासीय और गैर आवासीय भवनों का सर्किल रेट के आधार पर होल्डिंग टैक्स वसूली के निर्धारित किए गए नए नियम का सबसे ज्यादा असर कोडरमा के शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा।
इसका प्रमुख कारण यह है कि जिले के शहरी क्षेत्रों में फ्लैटों का निबंध अंदर झारखंड में सबसे अधिक है।
सर्किल रेट के लागू होने से शहर के आवासीय और गैर आवासीय भवनों के टैक्स का निर्धारण इसी दर के अनुसार किया जाना है। जिले में फ्लैटों के झारखंड के राजधानी सहित अन्य शहरों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा निर्धारित रजिस्ट्रेशन दर में कमी को लेकर कई बार राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है।
1000 स्क्वायर फीट वाले घरों से 600 की जगह अब 1758 रुपए टैक्स लिया जाएगा
विभाग स्तर से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व में जहां 1000 स्क्वायर फीट वाले मकानों से लिए जाने वाले वार्षिक 600 रुपए का होल्डिंग टैक्स बढ़कर अब 1758 रुपया होने का अनुमान है। वही कमर्शियल भवनाें से पूर्व में 1000 प्रति स्क्वायर फीट की दर से लिए जाने वाले 1720 रुपए होल्डिंग टैक्स के बढ़कर अब 5880 रुपए हो जाने का अनुमान है।
इसके अलावा शहरी क्षेत्र में स्थित खाली जमीनों के होल्डिंग टैक्स में भी वृद्धि की गई है । पूर्व में जहां खाली जमीन पर 1000 रुपए प्रति एकड़ की दर से की जाने वाली होल्डिंग टैक्स की वसूली अब 14 सौ रुपए प्रति एकड़ की डर से ली जाएगी।
नई नियमावली के तहत सभी भवनों का होल्डिंग नंबर निर्धारित किया जाना अनिवार्य है। वही बिना होल्डिंग नंबर के भवनों को 3 माह के अंदर होल्डिंग नंबर लेना अनिवार्य किया गया है। साथ ही ऐसा नहीं करने पर आवासीय भवनों पर 2000 व व्यवसायिक भवनों पर 5000 रु. जुर्माना की वसूली की जाएगी।
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