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गाजीपुर। नवीन सब्जी मंडी में सुविधाओं का अभाव होने से व्यापारियों और खरीदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मंडी में पर्याप्त गोदाम, जगह और साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से व्यवसाय करना चुनौती बन गया है। मंडी की हालत यह है कि अंदर से लेकर बाहर सड़क तक सब्जी, फल, बोरे और अन्य सामान बिखरे होने से दुर्गंध आती है। जिससे आवागमन में काफी परेशानी होती है और इसके साथ ही आने वाले लोग भी परेशान होते हैं।
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शहर के मुस्तफाबाद स्थित मंडी परिसर में 150 छोटी-बड़ी दुकानें लगती हैं। जिससे काफी भीड़ इक्ट्ठा हो जाती और अंदर काफी संकरा रास्ता है। जब मंडी के भीतर जगह नहीं बचती है तो व्यापारी बाहर रेलवे क्रासिंग से लेकर एमएएच इंटर कॉलेज तक सब्जी, फल आदि की दुकानें सजाते हैं। जिससे दो पहिया, चार पहिया और सब्जी-फल लदे छोटे-बड़े वाहनों को गुजारने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
व्यवसायियों का कहना है कि साल 1988 में इस निजी मंडी को विकसित किया गया। अभी 30 से 32 दुकानदारों के पास फल-सब्जी बेचने का लाइसेंस हैं। जो थोक विक्रेता हैं। इनके पास बाहर से आलू, टमाटर, हरी मिर्च, फल और अन्य सब्जियां आती हैं। लेकिन निजी मंडी होने के कारण सभी के लिए गोदाम की उपलब्धता नहीं होती है। जिससे आढ़ती बाहर ही सब्जी और फल को रखते हैं। तिरपाल से ढंकते हैं। बावजूद इसके बारिश में भीगने और चोरी होने पर काफी नुकसान हो जाता है।
मंडी समिति के अध्यक्ष मोइद्दीन राइनी का कहना है कि प्राइवेट मंडी होने से सारी व्यवस्था सीमित है। हम लोग सालों से सरकारी मंडी की मांग कर रहे हैं। जहां गोदाम, दुकान, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक ढंग से मिल सके। पिछले 35 सालों में लाइसेंस से चार गुना अधिक दुकानें लगने लगी है, जिससे पूरे मंडी के भीतर सुबह से दोपहर तक पैर रखने के लिए जगह नहीं रहती। ऐसे में यहां दुकानदारी करना काफी मशक्कत भरा होता है।
फल, सब्जी और गल्ला के लिए एक मंडी की मांग
व्यापारियों की मांग है कि शहर में ऐसी जगह उपलब्ध कराई जाए जहां फल, सब्जी और गल्ला मंडी एक ही जगह हो जाए। जिससे व्यापरियों को काफी सहूलियत होगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से चुंगी और घाट स्टेशन के आस-पास जमीन को लेकर चर्चा की गई थी लेकिन वह पर्याप्त नहीं हो पाई। जिससे मंडी को लेकर जमीन की तलाश जारी है।
700 रुपये महीना किराया, साफ-सफाई नदारद
नवीन मंडी में दुकान का किराया 700 रुपये महीना है। लेकिन उसकी तुलाना में सुविधाओं का अभाव है। हफ्ते में एक या दो बार ही कचड़ा उठान हो पाता है। जिससे मंडी के भीतर और आस-पास की सड़क पर कचरे का अंबार लगा रहता है।
शहर के मुस्तफाबाद स्थित मंडी परिसर में 150 छोटी-बड़ी दुकानें लगती हैं। जिससे काफी भीड़ इक्ट्ठा हो जाती और अंदर काफी संकरा रास्ता है। जब मंडी के भीतर जगह नहीं बचती है तो व्यापारी बाहर रेलवे क्रासिंग से लेकर एमएएच इंटर कॉलेज तक सब्जी, फल आदि की दुकानें सजाते हैं। जिससे दो पहिया, चार पहिया और सब्जी-फल लदे छोटे-बड़े वाहनों को गुजारने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
व्यवसायियों का कहना है कि साल 1988 में इस निजी मंडी को विकसित किया गया। अभी 30 से 32 दुकानदारों के पास फल-सब्जी बेचने का लाइसेंस हैं। जो थोक विक्रेता हैं। इनके पास बाहर से आलू, टमाटर, हरी मिर्च, फल और अन्य सब्जियां आती हैं। लेकिन निजी मंडी होने के कारण सभी के लिए गोदाम की उपलब्धता नहीं होती है। जिससे आढ़ती बाहर ही सब्जी और फल को रखते हैं। तिरपाल से ढंकते हैं। बावजूद इसके बारिश में भीगने और चोरी होने पर काफी नुकसान हो जाता है।
मंडी समिति के अध्यक्ष मोइद्दीन राइनी का कहना है कि प्राइवेट मंडी होने से सारी व्यवस्था सीमित है। हम लोग सालों से सरकारी मंडी की मांग कर रहे हैं। जहां गोदाम, दुकान, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक ढंग से मिल सके। पिछले 35 सालों में लाइसेंस से चार गुना अधिक दुकानें लगने लगी है, जिससे पूरे मंडी के भीतर सुबह से दोपहर तक पैर रखने के लिए जगह नहीं रहती। ऐसे में यहां दुकानदारी करना काफी मशक्कत भरा होता है।
फल, सब्जी और गल्ला के लिए एक मंडी की मांग
व्यापारियों की मांग है कि शहर में ऐसी जगह उपलब्ध कराई जाए जहां फल, सब्जी और गल्ला मंडी एक ही जगह हो जाए। जिससे व्यापरियों को काफी सहूलियत होगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से चुंगी और घाट स्टेशन के आस-पास जमीन को लेकर चर्चा की गई थी लेकिन वह पर्याप्त नहीं हो पाई। जिससे मंडी को लेकर जमीन की तलाश जारी है।
700 रुपये महीना किराया, साफ-सफाई नदारद
नवीन मंडी में दुकान का किराया 700 रुपये महीना है। लेकिन उसकी तुलाना में सुविधाओं का अभाव है। हफ्ते में एक या दो बार ही कचड़ा उठान हो पाता है। जिससे मंडी के भीतर और आस-पास की सड़क पर कचरे का अंबार लगा रहता है।
व्यवसाय करना बना चुनौती, गोदाम-शौचालय की दरकार है सरकार - अमर उजाला
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