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Wednesday, June 22, 2022

देह व्यवसाय की दल-दल से निकली अब डॉक्टर बनने की चाह - NavaBharat

देह व्यवसाय की दल-दल से निकली अब डॉक्टर बनने की चाह

  • दसवीं में हासिल किए 81.40 प्रश 

नागपुर. देह व्यवसाय में जो एक बार फंस जाए उसके बाहर निकलने की संभावना बहुत कम होती है लेकिन यदि सही मार्गदर्शन और पालकों जैसा प्यार मिल जाए तो यह भी संभव है. इसका जीता-जागता उदाहरण शासकीय कुरणा महिला गृह में देखने को मिला. देह व्यवसाय की दल-दल में फंसी 15 से 17 वर्ष की 3 किशोरियों को पुलिस ने महिला गृह में दाखिल करवाया. पहले तो परेशानी हुई लेकिन समुपदेशन से बदलाव आया. तीनों ने पढ़ाई शुरू की. अब तीनों किशोरियों ने 10वीं कक्षा में न सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि अच्छे अंक भी लाए. एक किशोरी ने 81.40 प्रश अंक हासिल किए. अब वह आगे पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहती है. अन्य 2 किशोरियों को 73.80 और 72.60 प्रश अंक मिले. वे दोनों भी नर्सिंग की ट्रेनिंग लेना चाहती हैं. 

लग गई थी बुरी आदतें 

मई 2021 में वाठोड़ा थाना क्षेत्र में एक सेक्स रैकेट पर छापा मारा गया था. वहां इन तीनों पीड़ितों को पुलिस ने छुड़ाया. न्यायालय और बाल कल्याण समिति ने उन्हें पाटणकर चौक स्थित करुणा महिला गृह में रखने के आदेश दिए. संगत के चलते उन्हें रातभर बाहर रहने, बाहर का भोजन और भी कुछ बुरी आदतें लग गई थी. इसीलिए तीनों करुणा गृह में नहीं रहना चाहती थीं. संस्था की समुपदेशक लता कांबले ने नियमित रूप से उनकी काउंसलिंग शुरू की. कुछ दिनों में ही बदलाव देखने को मिला. संस्था द्वारा उनके परिजनों से संपर्क किया गया. उन्होंने भी बच्चियों में सुधार लाने के इरादे से महिला गृह में रखने को कहा. संस्था की अधीक्षक शीला मांडवेकर ने तीनों को बताया गया कि वे पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है. इससे दोबारा उस दल-दल में जाने से बचा जा सकता है. 

NGO की मिली मदद

काउंसिलर कांबले, नारनवरे और सेव द चिल्ड्रन इंडिया नामक एनजीओ की अरुणज्योति कान्हेरे ने उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया और 10वीं की परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया. तीनों तैयार हो गई और पढ़ाई में लग गई. स्टेला फ्रांसिस द्वारा उनके शैक्षणिक दस्तावेज तैयार किए गए और स्कूल में प्रवेश दिलाया गया. संस्था में ही उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की गई. तीनों काउंसिलर उन्हें खुद परीक्षा केंद्र में ले जाती थी. वाठोड़ा पुलिस का संरक्षण होता था. इन बच्चियों की मेहनत रंग लाई और परिणाम सामने हैं. संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो पाया लेकिन इन तीनों की इच्छाशक्ति जरूरी थी. उन्हें संस्था में रहते हुए कई प्रकार के कोर्स करवाए गए हैं. अब और 3 किशोरियां 10वीं की परीक्षा देने के लिए तैयार हुए. 

किसी को नौकरी मिली, कोई व्यवसाय कर रहा

संस्था की अधीक्षक शीला मांडवेकर ने बताया कि प्रशासन और एनजीओ की मदद से यहां रहने वाली महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का काम किया जा रहा है. देह व्यवसाय से निकलकर 5 महिलाओं को कुक की नौकरी मिली हैं. कई महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मदद की गई. कोई ब्यूटी पार्लर चला रही तो कोई सिलाई का काम कर रही हैं. इन कामों में सेव द चिल्ड्रन इंडिया संस्था हर समय मदद के लिए तैयार रहती है लेकिन इसके लिए जरूरी है इन महिलाओं और युवती की इच्छा शक्ति जो केवल समुपदेशन से ही हो सकता है. 

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