देश में नेशनल मिल्क ग्रिड की स्थापना मांग
विश्व दुग्ध दिवस पर आईडीए ने किया राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
अजमेर सरस डेयरी अध्यक्ष चौधरी ने पशुपालकों व किसानों के हित में रखे अनेक मुद्दे
अजमेर
Updated: June 02, 2022 10:04:47 pm
अजमेर सरस डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए ) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में अपने व्याख्यान के दौरान कहा कि डेयरी व्यवसाय को कृषि या उद्योग क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए ताकि देश में कमजोर पड़ती जा रही श्वेत क्रांति को संजीवनी मिल सके। सेमिनार की अध्यक्षता आईडीए के अध्यक्ष जीएस राजोरिया ने की। चौधरी ने कहा कि दूध व्यवसाय को उद्योग या कृषि क्षेत्र में शामिल करने से कृषि उत्पादों की भांति इस पर भी समर्थन मूल्य लागू होने से दुग्ध व्यवसाय को बल मिलेगा। वर्तमान में बढ़ती महंगाई के कारण दुग्ध व्यवसाय के सामने संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चौधरी ने कहा कि देश में राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल मिल्क ग्रिड की स्थापना की जानी चाहिए। इससे दूध उन राज्यों को उपलब्ध करवाया जा सकेग ,जहां पर दुग्ध उत्पादन कम है।
सब्सीडी का प्रावधान करे सरकार
चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार दूध उत्पाद के निर्यात को प्रोत्साहन देने हेतु कम से कम 40 फ़ीसदी सब्सिडी का प्रावधान करे ताकि देश के अन्नदाता एवं पशुपालक किसानों के हितो की रक्षा की जा सके। चौधरी ने कहा कि पशु नस्ल सुधार के लिएब्राजील में उपलब्ध गीर गाय का सिमन पूरे देश में उपलब्ध करवाए जाए, इससे अच्छी नस्ल का गो धन तैयार हो सकेगा। साईवाल व कांकरेज नस्ल की गायों के सिमन्स भी उपलब्ध करवाने की बात चौधरी ने पुरजोर तरीके से रखी।
भविष्य में करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना
चौधरी ने कहा कि आने वाले समय में दुग्ध व्यवसाय को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नस्ल सुधार,पशु आहार,चारे की कमी का संकट, कच्चे माल की कमी, पशुओं की तुलना में कम हो रहे चारे की समस्या तथा चारे के भाव में हजार रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी गंभीर विषय हैं। वहीं पशु आहार के उपयोग में लिए जाने वाले मोलसिस पर 28 फीसदी जीएसटी लागू करके दुग्ध उत्पादको व पशुपालकों के सामने संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी हैं।
केंद्र की अनेक योजना नहीं उतरी धरातल पर
डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत दो से तीन वर्षों में एंब्रियो टेक्नोलॉजी, सेग्रीगेटड सिमन पद्धति प्रारंभ करने,पशुपालकों की आय दोगुनी करने, पशुओं का टेगीकरण करने,पशु बीमा योजना लागू करने, पशुपालक क्रेडिट कार्ड प्रारंभ करने जैसी अनेक योजनाओं की घोषणा की थी,इसके लि 15 हजार करोड रुपए की राशि का बजट भी आवंटित हैं,लेकिन इन योजनाओं मेें 10 से 20 फीसदी कार्य ही धरातल पर हो पाया है।
मिलावटखोरों को मिले आजीवन कारावास
डेयरी अध्यक्ष चौधरी ने कहा कि देश में 40 फ़ीसदी दूध एवं दूध से निर्मित उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इससे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और पशुपालकों को उनके शुद्ध दूध की कीमत नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान किया जाना चाहिए।
दूध खपत में राजस्थान दूसरे स्थान पर
चौधरी ने बताया कि राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध की खपत 491 मिलीग्राम तक होती हैं। राजस्थान, पंजाब के बाद दूसरा ऐसा राज्य हैं, जहां पर औसतन दूध की खपत प्रति व्यक्ति अधिक हैं। अतः ऐसे हालात में पशुपालकों के हितों का ध्यान रखना होगा।
एमपी,यूपी व हरियाणा भूसे से हटाए प्रतिबंध
चौधरी ने कहा कि राजस्थान में अनेक स्थान पर सूखा प्रभावित होने के कारण भूसे की जबरदस्त कमी उत्पन्न हो रही है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व हरियाणा द्वारा राज्य में आने वाले भूसे (खाखले) पर पिछले दो माह से प्रतिबंध लगा देने से यह संकट और भी गहरा गया है।
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