कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने सारी व्यवस्था को झकझोर डाला। लोगों को अपना काम धंधा बंद करना पड़ा। कई लोग इस हालात से घबराए नहीं, बल्कि अपने हौसले से दूसरा व्यवसाय कर रहे हैं। कोरोना को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने लाकडाउन करना शुरू कर दिया तो लोग खाने-कमाने के लिए परेशान होने लगे। ऐसी ही है बाबागंज विकास खंड के गुजवर गांव निवासी अब्दुल सलाम मुन्ना मांडा का संघर्ष गाथा। वह बीते तीन दशक से मुंबई में रहकर कपड़ों का कारोबार करते रहे। इनका कारोबार मुंबई से लेकर अहमदाबाद तक फैला हुआ था, लेकिन लाक डाउन होने के कारण इनकी कंपनी भी बंद हो गई। ऐसे में वह बीते एक पखवारा पूर्व अपनी पत्नी, दो बेटे व तीन बेटियों के साथ गांव लौट आए। सोचा था कि लाकडाउन खत्म होगा तो वह फिर परिवार के साथ मुंबई चले जाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे लाकडाउन बढ़ता देख उसके सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई। यह देख अब्दुल सलाम ने अपने भतीजे के साथ कई कंपनियों का दूध, दही एवं बिस्कुट आदि का व्यापार करना शुरू कर दिया। इससे अब उनके परिवार का खर्च चल रहा है। वह कहते है कि अब जब तक सब कुछ ठीक नही हो जाएगा, तब तक वह लौटकर मुंबई नही जाएंगे। अपना और अपने परिवार का खर्च निकाल ले रहे हैं। करने को यहां भी बहुत कुछ है, क्या परदेस में ही सब थोड़ी है। इंसान को हिम्मत से काम लेना चाहिए।
प्रतापगढ़ :मुंबई ने मुंह मोड़ा तो दूध-दही के व्यवसाय से नाता जोड़ा - Samachar Nama
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