
भदोही : वैश्विक महामारी के कारण उपजे हालात, चीन के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय देशों में चल रही विरोध की लहर के बीच भारतीय कालीन उद्यमी मौका भुनाने के प्रयास में जुटे हैं। चीन से कालीन व्यवसाय प्रभावित होने के कारण हुए नुकसान की भरपाई निर्यातक चीन विरोधी देशों से व्यापार बढाकर करना चाहते हैं। सितंबर 2020 में आयोजित दूसरे वर्चुअल फेयर में कालीन निर्यात संवर्द्धन परिषद (सीईपीसी) द्वारा इस पर विशेष फोकस किया गया था।
विशेषकर आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित उन्हीं देश के आयातकों को आमंत्रित किया गया था जिन देशों के 90 फीसद व्यावसायिक संबंध चीन से थे। फेयर के दौरान संपर्क में आए आयातकों से व्यापार होने लगा है। निर्यातक बता रहे कि पहले की अपेक्षा आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व कनाडा से 20 से 25 फीसद व्यवसाय में वृद्धि हुई है जबकि ब्राजील, नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क में नए ग्राहकों की तलाश पूरी हुई है। उनसे व्यवसाय भी हो रहा है। निर्यातकों का कहना है कि कोरोना के बाद बदले हालात में अमेरिका व जर्मनी पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। अमेरिका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा खरीदार है। देश में होने वाले कालीन निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 60 फीसद है जबकि 30 फीसद कालीन जर्मनी सहित अन्य यूरोपीय देशों को भेजा जाता है।
कोरोना काल में अमेरिका, जर्मनी व फ्रांस से होने वाले व्यवसाय में कमी आई है। यही कारण है कि भारतीय कालीन निर्यातक उन देशों में हाथ पांव मार रहे हैं जो चीन से व्यवसाय करते थे। पिछले साल सितंबर में आयोजित तीन दिवसीय दूसरे वर्चुअल फेयर में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित उन्हीं देश के आयातकों को आमंत्रित किया गया था जो चीन से अधिक व्यवसाय करते थे। इसका लाभ भी उद्योग को मिला।
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सरकार की मंशा के अनुसार आपदा को अवसर में बदलने के लिए किए जा रहे प्रयास का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। जिन देशों ने चीन से व्यावसायिक संबंध समाप्त कर लिए हैं उनको साधना उद्योग के हित में है। आस्ट्रेलिया पहले से ही भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों का बड़ा ग्राहक रहा है। अब मशीनमेड सहित अन्य भारतीय कालीन उत्पादों में रुचि बढ़ी है।
- ओंकारनाथ मिश्रा, अध्यक्ष अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा)
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आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व कनाडा से पहले भी व्यवसाय करते थे लेकिन पिछले एक साल से इन देशों के ग्राहकों ने भारतीय कालीन में अधिक रुचि दिखाई है। आर्डर भी अधिक मिल रहे हैं। विशेषकर कनाडा, स्वीडन, नार्वे, डेनमार्क व ब्राजील के आयातक भारतीय कालीन को पसंद कर रहे हैं।
-संजय गुप्ता, निर्यातक।
Edited By: Jagran
एंटी चाइना देश के आयातक बनेंगे कालीन उद्योग के खेवनहार - दैनिक जागरण
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