
एक्सएलआरआइ जाना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी. यह महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मेरे घर से बहुत दूर था. कॉलेज जाने के लिए अभिभावकों खासकर पापा को मनाने के लिए थोड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी क्योंकि ट्रेन से 48 घंटे सफर करने जाना था.
एक्सएलआरआइ पहुंचने पर मुझे एहसास हुआ कि मैं एक कुएं में रह रही थी. वहां अद्भुत वातावरण था. बहुत ज्यादा समानता थी. मुझे अब हर चीज के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता था. मैं बहुत सारे अवसर देख सकती थी.
वयस्क बनने के लिए यह एक शानदार जगह थी. मैंने संगीत का आनंद लेना शुरू कर दिया और बैंड से प्यार करने लगी. मेरे लिए तो जैसे पूरी दुनिया खुल गई.
एक्सएलआरआइ के हर पाठ्यक्रम में संगठन, लोगों, रिश्तों के महत्व पर जोर रहता है. मेरे लिए वहां का सीखने का माहौल, ट्यूटर का पालन-पोषण, पहली बार जीवन को ठीक से अनुभव करने वाला एक युवा होने का आनंद था जिसने इसे इतना खास बना दिया. इसने मुझे उस लायक बनाया, जहां मैं आज हूं.
लीना नायर यूनिलीवर की पहली महिला, पहली एशियाई, सबसे कम उम्र की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी और यूनिलीवर लीडरशिप एग्जीक्यूटिव की सदस्य हैं. वे एक्सएलआरआइ-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में पढ़ी हैं
—लीना नायर.
मेहमान का पन्नाः एक्सएलआरआइ ने मुझे व्यवसाय चलाने में लोगों के महत्व के बारे में सिखाया - Aaj Tak
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