
फूलबेहड़ के मकसोहा परसिया घाट के 27 वर्षीय युवा चेतन वीर सिंह ने वैज्ञानिक तकनीक से गुड़ कोल्हू लगाकर नहीं इबारत लिखी है।
लखीमपुर : विकासखंड फूलबेहड़ के मकसोहा परसिया घाट के 27 वर्षीय युवा चेतन वीर सिंह ने वैज्ञानिक तकनीक से गुड़ कोल्हू लगाकर नई इबारत लिखी है। ड्रायर लगाने से खोई को सुखाने में लेबर का खर्च बचा। 11 प्रतिशत गन्ने की रिकवरी भी निकल रही है। चेतन वीर मर्चेंट नेवी में थर्ड इंजन आफिसर की नौकरी छोड़कर गुड कोल्हू से राब बना रहे है। दिसंबर माह से जैविक गुड़ बनाएंगे। युवा वैज्ञानिक मुनीर के सहयोग से यह सब संभव हो पाया है। कोविड-19 के दौरान घर आए चेतन वीर ने गांव में ही व्यापार करने का मन बनाया। मुजफ्फरनगर जाकर उन्होंने गुड व्यवसाय के गुर सीखे। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिले इसके लिए उन्होंने जूस रिकवरी मीटर खरीदा। इसके जरिए गन्ने से कितना गुड़ तैयार होगा, इसका अंदाजा लगाकर वह किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करते हैं। वर्तमान में जब अन्य गुड कोल्हू संचालक किसानों से 100 रुपये क्विटल की दर से गन्ने की खरीद करके भी घाटे में जा रहे हैं, वहीं चेतन वीर किसानों को ढाई सौ रुपये प्रति क्विटल का भाव देकर भी मुनाफे में है। पिछले तीन माह में करीब 12000 क्विटल गन्ने की पेराई कर चुके हैं। राब का तीन हजार रुपये क्विटल का भाव मिल रहा है। युवा वैज्ञानिक मुनीर की सलाह पर चेतन वीर ने गुड़ कोल्हू में ड्रायर लगाया है। नया तैयार ड्रायर करीब 10 लाख रुपये की कीमत का पड़ रहा था। उन्होंने टीन की चद्दर मुजफ्फरनगर से और गियर दिल्ली की मायापुरी से खरीदा। चेतन ने मात्र चार लाख रुपये में ही ड्रायर तैयार कर लिया। इससे सुखी खोई निकलती है। उन्हें खोई को सुखाने के लिए न ही श्रमिक चाहिए और न अतिरिक्त जगह की जरूरत है। चेतन दिसंबर माह से जैविक गुड़ बनाएंगे। विकासखंड नकहा के ग्राम सभा निवासी अनूप मिश्रा उर्फ फौजी ने भी ड्रायर लगाकर गन्ने की पेराई शुरू की है। जिले में राब और गुड़ का व्यवसाय करने वाले अब दो किसान हाईटेक हो चुके हैं। लखनऊ गुड़ महोत्सव में भी चेतन वीर का गुड़ का स्टाल लग चुका है। इस बार चेतन वीर गुड़ की और नई वैरायटी तैयार करने वाले हैं।
Edited By: Jagran
देशी गुड़ कोल्हू को हाइटेक बनाकर चेतन कर रहे व्यवसाय - दैनिक जागरण
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