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चौडगरा। जनपद में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाली मौहार किसान सेवा सहकारी समिति चौडगरा को इस साल नियमित रूप से खाद नहीं मिल रही। ऐसे में कर्मचारियों का वेतन तक निकलना मुश्किल होगा।
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मौहार किसान सेवा सहकारी समिति चौडगरा में लगभग दो हजार सक्रिय सदस्य हैं। आसपास के 22 गांवों के किसान इस समिति से खाद लेते हैं। इनमें गंगा कटरी के किसान भी शामिल हैं।
पिछले साल 10 नवंबर तक समिति ने 55 लाख का व्यवसाय किया था। इस साल अभी तक मात्र 20 लाख का व्यवसाय हो पाया है। यही नियम कानून यूरिया पर लगे तो पूर्ण व्यवसाय हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
समिति में सचिव के अलावा एक सहयोगी भी नियुक्त है। व्यवसाय के आधार पर ही इनका वेतन निकलता है। सचिव सुमेर सिंह ने बताया कि एक ट्रक खाद बिक्री के बाद दो दिन का अंतराल हो जाता है।
क्षेत्र के हिसाब से खाद भी नहीं मिल रही है। इससे व्यवसाय प्रभावित होना स्वाभाविक है। अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह पप्पू ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के कारण खाद बिक्री में देरी के साथ व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। इसलिए समितियों की दयनीय स्थिति होती जा रही है। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो चालू समितियां भी बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगी।
मौहार किसान सेवा सहकारी समिति चौडगरा में लगभग दो हजार सक्रिय सदस्य हैं। आसपास के 22 गांवों के किसान इस समिति से खाद लेते हैं। इनमें गंगा कटरी के किसान भी शामिल हैं।
पिछले साल 10 नवंबर तक समिति ने 55 लाख का व्यवसाय किया था। इस साल अभी तक मात्र 20 लाख का व्यवसाय हो पाया है। यही नियम कानून यूरिया पर लगे तो पूर्ण व्यवसाय हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
समिति में सचिव के अलावा एक सहयोगी भी नियुक्त है। व्यवसाय के आधार पर ही इनका वेतन निकलता है। सचिव सुमेर सिंह ने बताया कि एक ट्रक खाद बिक्री के बाद दो दिन का अंतराल हो जाता है।
क्षेत्र के हिसाब से खाद भी नहीं मिल रही है। इससे व्यवसाय प्रभावित होना स्वाभाविक है। अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह पप्पू ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के कारण खाद बिक्री में देरी के साथ व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। इसलिए समितियों की दयनीय स्थिति होती जा रही है। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो चालू समितियां भी बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगी।
नियमित खाद न मिलने से समिति का व्यवसाय प्रभावित - अमर उजाला
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